शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

अनुसूचियां ओर उनके अनुच्छेद सहित संविधान की प्रक्रिया

अनुच्छेद 248 -अवशिष्ट शक्तियां
  इन विषयों पर कानून केंद्र सरकार के द्वारा बनाया जाता है इसमें दो विशेष शामिल किए जाने प्रस्तावित है-
(1) साइबर क्राइम
(2) सेरोगेसी मदर (किराए की कोख)
अनुच्छेद 249 राष्ट्रीय महत्व (राज्य सूची)
 सामान्य थे राज्य सूची के विषय पर कानून राज्य सरकार द्वारा बनाए जाते हैं लेकिन राज्य सूची का ऐसा विशेष जो राष्ट्रीय महत्व से संबंधित वह ऐसे विषय पर अगर राज्यसभा दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दे तो राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने की शक्ति संसद को प्राप्त हो जाएगी
अनुच्छेद 250 आपातकाल
 आपातकाल के समय राज्य सूची के विषय पर कानून संसद के द्वारा बनाया जा सकता है
(8) अनुसूची- भाषा
 किसी भी भाषा को मान्यता तभी मिलती है जब वह भाषा आठवीं अनुसूची में शामिल हो जाती है मूल संविधान में 14 भाषाएं थी लेकिन वर्तमान में 22 भाषाएं हैं
15-सिंधी 21 वें संविधान संशोधन 1967
16 मणिपुरी
17 नेपाली
18 कोंकणी
(71 वें संविधान संशोधन 1992 सभी)
19 बोडों
20 डोंगरी
21 मैथिली
22 संथाली
[92 वे संविधान संशोधन 2003]
तीन भाषाएं आठवीं अनुसूची में जुड़ने प्रस्तावित है
(१) भोंटी
(२) भोजपुरी
(३) राजस्थानी
नोट  राजस्थानी भाषा के व्याकरण हेतु एक समिति का निर्माण किया गया जिसके अध्यक्ष-ओंकार सिंह लखावत
 आठवीं अनुसूची में शास्त्रीय भाषाओं का उल्लेख है
(१) संस्कृत
(२) तमिल
(३) तेलुगू
(४) कन्नड़
(५) ओड़िया
(६) मलयालम

अनुच्छेद 344 (2) 
 इसमें कुल 22 सदस्य और एक अध्यक्ष होता है-आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं से एक-एक सदस्य राजभाषा में शामिल होता है
कार्य- आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं का संरक्षण करना
अनुच्छेद 344 (3) राजभाषा
  एकमात्र समिति है जिसका संविधान में उल्लेख है इसमें कुल 30 सदस्य होते हैं जिनमें से 20 सदस्य लोकसभा से एवं 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे
कार्य-हिंदी भाषा को बढ़ावा देना
(9) अनुसूची -न्यायिक पुनरावलोकन
प्रथम संविधान संशोधन 1951 के द्वारा जोड़ी गई इसमें न्यायिक पुनरावलोकन एक भूमि सुधार का उल्लेख है
ऐसा कोई कानून जिसको संसद ने बना कर अगर नवी अनुसूची में डाल दिया गया हो तो न्यायपालिका उसका न्यायिक पुनरावलोकन नहीं कर सकती
Note  
  केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
इस बात से सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि अगर संसद द्वारा बनाया गया कोई कानून संविधान के मूल ढांचे को प्रभावित करता है तो न्यायपालिका उसका न्यायिक पुनरावलोकन कर सकती है
(10) अनुसूची-दल बदल
 92 सविधान संशोधन 1985 में जोड़ी गई इसमें उल्लेख है कि अगर एक तीआई से कम सदस्य एक पार्टी को छोड़कर दूसरी पार्टी में जाते हैं तो वह दलबदल माना जाएगा
एवं संबंधित सदन के अध्यक्ष या सभापति को यह अधिकार होगा कि वह दल बदल के संबंध में निर्णय करेंगे हो जा साथ में एक टी आई के स्थान पर सदस्यों की संख्या दो तिहाई कर दी गई तथा वर्तमान में दो तिहाई से कम सदस्य एकदम को छोड़कर दूसरे दल में जाते हैं तो वह दलबदल माना जाएगा अगर एक पार्टी का विलय दूसरी पार्टी में हो जाता है तो वह दलबदल नहीं माना जाएगा
(11) अनुसूची-पंचायती राज
 73वें संविधान संशोधन 1993 में जोड़ी गई पंचायती राज भाग 9 में अनुच्छेद 243A se 243O tak
इसमें कुल विषयक 29 है
24 अप्रैल 1993 को पंचायती राज अधिनियम लागू हुआ
(12) अनुसूची-नगरीय निकाय
 74 वे संविधान संशोधन 1994 में भाग 9a संविधान संशोधन में उल्लेख किया गया है
अनुच्छेद 243P से 243Z तक इस अनुसूची में 18 विषय है

मंगलवार, 7 जनवरी 2020

संविधान की प्रमुख सूचियां

भारतीय संविधान की अनुसूचियां
 मूल संविधान मैं 8 अनुसूचियां थी लेकिन वर्तमान में 12 अनुसूचियां हैं
(1) अनुसूची-(संघ एवं राज्य क्षेत्र)
भारत के सभी राज्यों के नाम एवं केंद्र शासित प्रदेशों का नाम इनके अलावा इन सब की राजधानियों के नाम उल्लेख है
(2) अनुसूची-(वेतन)
भारत के प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारियों का उल्लेख है लेकिन राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को वेतन के स्थान पर परिलब्धियां दिया प्रदान की जाती है उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के सभापति के रूप में वेतन मिलता है
अनुसूची में निम्नलिखित पदाधिकारियों का वेतन का उल्लेख है-
(A) लोकसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का वेतन
(B) राज्यसभा के सभापति एवं उपसभापति का वेतन
(C) विधानसभा के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का वेतन
(D) विधान परिषद के सभापति एवं अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का वेतन
(E) सर्वोच्च न्यायालय के सभापति अध्यक्ष एवं उप अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय का वेतन
(F) नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक का वेतन
(3) अनुसूची-(शपथ)
भारत के प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारियों को शपथ का उल्लेख है लेकिन राष्ट्रपति अनुच्छेद-60
उपराष्ट्रपति अनुच्छेद-69
राज्यपाल अनुच्छेद-159
इनकी शपथ का उल्लेख तीसरी अनुसूची में नहीं किया
तीसरी अनुसूची में निम्नलिखित पदाधिकारियों का शपथ का उल्लेख है-------
(1) विधानसभा विधान परिषद लोकसभा एवं राज्यसभा के उम्मीदवारों की शपथ
(2) संसद एवं विधान मंडल के सदस्यों की शपथ
(3) केंद्र एवं राज्य के मंत्रियों की शपथ
(4) सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की शपथ
(5) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की शपथ
नोट
लोकसभा एवं विधानसभा के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष राज्यसभा एवं विधान परिषद के सभापति एवं उपसभापति की कोई शपथ नहीं होती है
(4) अनुसूची-(राज्य सभा के सीटों का बंटवारा/आवंटन)
राज्यसभा में सीटों का आवंटन जनसंख्या के आधार पर किया गया है
राज्यसभा में अधिकतम सदस्य 250 हो सकते हैं लेकिन वर्तमान में 245 सदस्य है
उत्तर प्रदेश-31
मध्य प्रदेश-11
गुजरात-11
राजस्थान-10
पंजाब -7
हरियाणा-5
जम्मू कश्मीर-4
नोट
  राज्यसभााा में अनुसूची जाति एवं जनजाति केे लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान नहीं है
(5) अनुसूची-(अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन)
भारत के राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास हेतु भारत के किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित कर सकता है एवं इन क्षेत्रों से संबंधित प्रशासन अपने नियंत्रण ले सकता है
राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को यह अधिकार है कि इन क्षेत्रों से संबंधित से बने कानून को संशोधन कर सकते हैं इन क्षेत्रों से विकास हेतु एक जनजातीय परिषद का गठन किया गया है जिसमें कुल 30 सदस्य होंगे एवं यह सदस्य इन क्षेत्रों से संबंधित जल जंगल जमीन का संरक्षण करेंगे
(6) अनुसूची (अमिमेत्री)
असम मिजोरम मेघालय एवं त्रिपुरा राज्यों का प्रशासन इन राज्यों में एक जनपद का गठन किया गया है जिसमें कुल 20 सदस्य होंगे यह इन क्षेत्रों से संबंधित जल जंगल जमीन संस्कृति की सुरक्षा करेगी
(7) अनुसूची-(विषयों का बंटवारा)
अनुच्छेद 246 में तीन प्रकार की सूचियों का उल्लेख है जो निम्नलिखित है----(1) संघ सूची--
मूल संविधान में 97 विषय थे लेकिन वर्तमान में 100 विषय है इन विषयों पर कानून बनाने की शक्ति केंद्र संसद को प्रदान की गई है
(2) राज्य सूची--
मूल संविधान में राज्य सूची में 66 विषय थे वर्तमान में 61 विषय है इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार राज्य अर्थात विधानमंडल को दी गई है
(3) समवर्ती सूची
मूल संविधान में समवर्ती सूची में 47 विषय थे लेकिन वर्तमान में 52 विषय है इन विषयों पर कानून संसद एवं विधान मंडल दोनों बना सकते हैं लेकिन संसद के द्वारा बनाया गया कानून अधिक प्रभावित होता है
नोट  42 वें संविधान संशोधन 1976 के द्वारा पांच विषय राज्य सूची से समवर्ती सूची में डाल दिए गए
(१) शिक्षा एवं वन्य जीव (२)पक्षी संरक्षण  (३) बाट एवं माप (४)जनसंख्या नियंत्रण परिवार नियोजन

सोमवार, 6 जनवरी 2020

भारत का संविधान एवं उनकी विशेषताएं

भारतीय संविधान की विशेषताएं
 (1) भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान आइवर जेनिग्स के अनुसार भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है
भारत के संविधान के बड़े होने के कारण  1संविधान निर्माण से पूर्व भारत की शासन व्यवस्था 1935 केेेे अधिनियम के अनुसार संचालित हो रही थी|
भारत के संविधान में भी बहुत सारी बातों को 1935 के अधिनियम से शामिल किया गया है
≥ 2भारत का विशाल भौगोलिक क्षेत्र
3सम्पूर्ण भारत के लिए एक संविधान
4विश्व का एकमात्र भारतीय संविधान ही ऐसा है जिसमें तीन स्तर की सरकारों का उल्लेख है
(A) संघ सरकार
(B) राज्य सरकार
(C) स्थानीय स्वशासन
 मूल संविधान में 8 अनुसूचियां 22 भाग 395 अनुच्छेद
  लेकिन वर्तमान में 12 अनुसूचियां उप भाग 25 भाग और उपअनुच्छेद सहित 460 केे लगभग अनुच्छेद है
(2) भारतीय संविधान कठोर एवं लचीलेपन का मिश्रण
भारतीय संविधान में संविधान संशोधन के दोनों रूपों को स्वीकार किया गया अर्थात संविधान में कुछ संशोधन साधारण बहुमत से किए जा सकते हैं जैसे नए राज्यों का गठन राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन एवं राज्य के नाम में परिवर्तन
लेकिन कुछ संविधान संशोधन विशेष बहुमत एवं कुछ संविधान संशोधन विशेष बहुमत से कुछ संविधान संशोधन विशेष बहुमत+अध्य राज्यों की अनुमति से किए जा सकते हैं
जैसे मौलिक अधिकारों में करो मैं कमियां वृद्धि से संबंधित संशोधन इनका उल्लेख अनुच्छेद 368 में किया गया है
(3) एकल नागरिकता  
भारतीय संविधान में एकल नागरिकता को स्वीकार किया गया है अर्थात संपूर्ण भारत के लिए एक ही नागरिकता होगी जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में दोहरी नागरिकता को स्वीकार किया गया है
(4) संसदीय शासन प्रणाली
भारत ने अपने संविधान में संसदीय शासन प्रणाली को स्वीकार किया है जिसके अनुसार भारत में दोहरी कार्यपालिका होगी वास्तविक कार्यपालिका का प्रधान प्रधानमंत्री एवं नाम मात्र कार्यपालिका का प्रधान राष्ट्रपति होगा जो ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली पर आधारित है
(5) विदेशी स्त्रोतों से गृहीत भारतीय संविधान
 भारतीय संविधान में विश्व के कई देशों के संविधान का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है
जैसे-सविधान का दार्शनिक भाग(मौलिक अधिकार नीति निर्देशक तत्व अमेरिका और आयरलैंड के संविधान से लिए गए)
संसदीय शासन प्रणाली ब्रिटेन के संविधान पर आधारित संविधान संशोधन की प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान पर आधारित एवं इनके अलावा विश्व के कई देशों का प्रभाव दिखाई देता है
जैसे-जर्मनी जापान रूस फ्रांस आदि
नोट डॉ भीमराव अंबेडकर ने कहा कि चुकी भारत के संविधान में विश्व के कई देशों का प्रभाव दिखाई देता है लेकिन इसे उधार का थैला कहना उचित नहीं है क्योंकि संविधान सभा के सदस्य  इनमें आवश्यक संशोधन करने के पश्चात ही भारत की परिस्थितियों के अनुसार इन्हें संविधान सभा में जोड़ा गया
(6) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार 
भारतीय संविधान के अनुसार भारत में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को अपनाया गया इनके लिए नागरिकों के लिए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्राप्त किया गया 61 वें संविधान संशोधन के अनुसार 1981 के अनुसार मताधिकार की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई
(7) एकात्मक के साथ संघीय झुकाव
     भारतीय संविधान में एकात्मक के साथ संघीय विशेषताओं को भी स्वीकार किया गया
एकात्मक विशेषताओं में जैसे एकल नागरिकता सर्वोच्च न्यायालय अखिल भारतीय सेवाएं एवं आपातकाल आदि
इनके अलावा कुछ संघात्मक विशेषताएं भी है जैसे दोहरी कार्यपालिका विषयों का बंटवारा केंद्र एवं राज्यों के लिए अलग-अलग सरकारी आदि
(8) मौलिक अधिकार 
अति संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकारों का उल्लेख है
जिससे राजनीतिक लोकतंत्र का पोषक कहा जाता है
अधिकार नागरिकों को राज्य के विरुद्ध प्राप्त होते हैं और यह अधिकार व्यक्ति के व्यक्तिगत हितों की रक्षा करते हैं
(9) राज्य के नीति निर्देशक तत्व
     भारतीय संविधान के भाग 4 के अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के कृतियों का उल्लेख कर रखा है
जो सामाजिक आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना में सहायक है भारत को लोक कल्याणकारी राज्य बनाने में भी इन नीति निर्देशक तत्वों का महत्वपूर्ण योगदान है
यह व्यक्ति के समूह के रूप में सामाजिक आर्थिक हितों की रक्षा करते हैं
(10) पथ निरपेक्ष समाजवादी राज्य
 भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निरपेक्ष और समाजवादी शब्द उल्लेखित है जिसका आशय है भारत का कोई राज्य धर्म नहीं होगा सभी धर्मों के प्रति राज्य का एक समान नीति को अपनाएगा लेकिन राज्य धर्म का विरोधी नहीं होगा
समाजवाद से तात्पर्य है कि उत्पादन एवं वितरण के साधनों पर सार्वजनिक स्वामित्व हो लेकिन भारत में मिश्रित समाजवाद को स्वीकार किया गया
जिसका तात्पर्य है कि सार्वजनिक के साथ निजी क्षेत्रों में भी राज्य की नीति को बनाया जाएगा

रविवार, 5 जनवरी 2020

संविधान के महत्वपूर्ण तथ्य संविधान की रूप रेखा

संविधान सभा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
सविधान के उपाध्यक्ष =H C मुखर्जी V .T कृष्णमाचारी
संविधान सभा के सचिव H=अयंगर
संविधान सभा के वैज्ञानिक सलाहकार=B N राव
संविधान सभा में कुल बैठके=165
संविधान सभा में कुल अधिवेशन=11+1=12 (24 जनवरी 1950)
संविधान सभा में कुल वाचन=3 बार
सविधान के सुलेखन का कार्य=प्रेम बिहारी नारायण
संविधान सभा का प्रतीक=हाथी
संविधान सभा की मूल भाषा=अंग्रेजी (इसे हिंदी में अनुवादित 1954 में घनश्याम सिंह गुप्ता और पंडित सुंदरलाल ने किया)
संविधान सभा पर चित्रकारी का कार्य=नंदलाल घोष
प्रस्तावना पर चित्रकारी का कार्य=राम मनोहर सक्सेना ने किया
धान के निर्माण में कुल समय-2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे
कुल खर्चा-64 लाख
संविधान सभा में एंग्लो इंडियन का समुदाय का प्रतिनिधित्व -फ्रैंक एंथनी ने किया
अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व संविधान सभा में प्रतिनिधित्व-जयपाल सिंह ने किया
संविधान सभा में महिलाओं की संख्या -15
निर्वाचित महिलाएं-8
मनोनीत महिलाएं-7
संविधान सभा में एकमात्र मुस्लिम महिला -बेगम एजाज रसूल थी
सविधान सभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व
अजमेर मेरवाड़ा-मुकुट बिहारी भार्गव (एकमात्र निर्वाचित सदस्य)
मनोनीत सदस्य-
जयपुर-हीरालाल शास्त्री, वीटी कृष्णमाचारी
उदयपुर-माणिक्य लाल वर्मा, बलवंत सिंह मेहता
जोधपुर-जय नारायण व्यास, सीएस वेंकटाचारी
कोटा-दलेल सिंह
भरतपुर-राजबहादुर
बीकानेर-जसवंत सिंह
खेतड़ी (झुंझुनू)-सरदार सिंह
शाहपुरा-गोकुल लाल असावा
अलवर-रामचंद्र उपाध्यक्ष
विशेष आमंत्रित सदस्य 
(1) K.M  पणीकर
(2) T विजय राघवाचारी
संविधान सभा से संबंधित महत्वपूर्ण कथन 
(1) पंडित जवाहरलाल नेहरू-भारत की संविधान सभा चलयान राष्ट्र है
(2) लॉर्ड साइमन- भारत की संविधान सभा हिन्दुओं  का संगठन है
(3) चर्चिल-भारत की संविधान सभा एक जाति का संगठन है
(4) ग्रोनविल ऑस्टिन-भारत की संविधान सभा कांग्रेस हैं और कांग्रेस ही भारत है
(5) आईवर जेनीन--भारत की संविधान सभा वकीलों का स्वर्ग है

शुक्रवार, 3 जनवरी 2020

सविधान सभा एक अंतरिम रूप

संविधान निर्माण की प्रक्रिया
9 December 1946 इस दिन संविधान सभा की प्रथम बैठक का आयोजन दिल्ली के सेंट्रल हॉल पुस्तकालय मेंं आयोजन किया जिसमें कुल 207 सदस्यय उपस्थित रहे जिनमें 9 महिला शामिल थी
देसी रियासतों और मुस्लिम लीग ने प्रथम बैठक का बहिष्कार किया इसको लेकर सचिव ने कहा कि भारत की संविधान सभा उस विवाह के समान है जिसकी दुल्हन ही गायब है
प्रथम बैठक में सविधान सभा के अस्थाई अध्यक्ष डॉ सच्चिदानंद सिन्हा को बनाया गया जो संविधान सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य थे
यह प्रणाली फ्रांस से ग्रहण की गई
11 दिसंबर 1946 इस दिन सविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को बनाया गया जिनका प्रस्ताव आचार्य कृपलानी ने रखा एवं उनका समर्थन सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा किया गया
13 दिसंबर 1946 इस दिन संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा उद्देश्य प्रस्ताव रखा गया लेकिन मुस्लिम लीग ने बहिष्कार के कारण उद्देश्य प्रस्ताव को इस दिन पारित नहीं किया गया
22 जनवरी 1947 इस दिन संविधान सभा से उद्देश्य प्रस्ताव को पारित कर दिया गया उद्देश्य प्रस्ताव की वर्तमान का सविधान प्रस्तावना का आधार बना इस कारण प्रस्तावना को उद्देशिका के नाम से भी जाना जाता है
नोट-उद्देश्य प्रस्ताव को पारित होने में कुल 41 दिन का समय लगा
29 अगस्त 1947 भारतीीय संविधान का प्रारूप बीएन राव के द्वारा तैयार किया गया
इस प्रारूप पर विचार करने हेतु प्रारूप समिति/पांडुलेखन समिति का गठन किया गया जिसमें कुल 7 सदस्य थे
7 सदस्य के नाम
(1) भीमराव अंबेडकर
(2) मोहम्मद सादुल्ला
(3) के एम मुंशी
(4) अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर
(5) गोपाल स्वामी आयंकर
(6) एन माधवराव(बीएल मित्र के इस्तीफे के पश्चात)
(7) TT कृष्णमाचारी (डीपी खेतान मृत्यु के बाद)
26 नवंबर 1949 
                       इस दिन सविधान का कार्य पूर्ण हो गया सविधान के महत्वपूर्ण 16 अनुच्छेदों को इसी दिन लागू किया (15+394=16 अनुच्छेद)
इस दिन भारतीय संविधान को आंशिक रूप से लागू किया गया
24 जनवरी 1950 
  इस दिन संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई थी जिसने कुल 284 सदस्यों ने भाग लिया इन सदस्यों के द्वारा संविधान पर हस्ताक्षर किए गए प्रथम हस्ताक्षर krta पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं अंतिमा हस्ताक्षर krta डॉ राजेंद्र प्रसाद थे
इस दिन राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को मान्यता प्रदान की गई
जबकि राष्ट्रध्वज को 22 जुलाई 1947 को प्रदान की गई
इसका निर्माण पिंगली वेंकैया द्वारा किया गया
24 जनवरी को ही भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में डॉ राजेंद्र प्रसाद को निर्वाचित किया गया इस दिन संविधान सभा को विघटित या समाप्त कर दिया गया लेकिन कहा गया कि भारत में जब तक स्थाई संसद का निर्माण नहीं हो जाता जब तक संविधान सभा अंतरिम संसद के रूप में कार्य करेगी एवं इसकी अध्यक्षता जीवी मावलंकर के द्वारा की जाएगी
प्रथम संविधान संशोधन 1951 इसी अंतरिम संसद के द्वारा ही किया गया
26 जनवरी 1950
इस दिन संविधान को पूर्ण रूप से लघु किया गया भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में डॉ राजेंद्र प्रसाद को शपथ दिलाई गई एवं इसी दिन भारत को गणतंत्र/गणराज्य घोषित किया गया